गुच्छी क्या है?
गुच्छी (MOREL) वानस्पतिक नाम :- Morchella esculenta(मार्कुला एसक्यूलेंटा') है।
गुच्छी बर्फ पिघलने के कुछ दिन बाद ही उगती है। इसका उत्पादन पहाड़ों पर बिजली की गड़गड़ाहट और चमक से निकलने वाली बर्फ से होता है। यह स्वाद में बेजोड़ और कई औषधियों गुणों से भरपूर है।
भारत और नेपाल में स्थानीय भाषा में इसे 'गुच्छी', छतरी, टटमोर, डुंघरू या जुमुला कहा जाता है।
गुच्छी उत्तराखंड, हिमाचल तथा कश्मीर सहित हिमालय के कई उच्च स्थानों में पाई जाती है।
हालांकि दुनिया में बहुत सी वैरायटी के मशरूम हैं, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा गुच्छी मशरूम की ही होती है।
मशरूम दो तरह के होते हैं एक साधारण मसरूम जिसमें आमतौर पर बटन मशरूम कहते हैं ,जबकि दूसरे औषधीय महत्व वाले जिसमें गुच्छी जैसी मशरूम की प्रजातियां शामिल हैं।
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में गुच्छी की कीमत काफी ज्यादा है। गुच्छी मधुमक्खी के छत्ते जैसी टोपी के कारण आसानी से पहचानी जा सकती है।
सेन्ट्रल एवं वेस्टर्न हिमालयी क्षेत्र के स्थानीय लोग इस मशरूम का इस्तेमाल कई सालों से स्वास्थ्यवर्धक आहार के रूप करते आये हैं। लैटिन भाषा में इसे मोर्सेला एस्कुलेन्टा या मोरेल मशरूम के नाम से जाना जाता है।
यह मशरूम उत्तराखंड व हिमांचल प्रदेश के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में खुद ही उगते हैं। हालांकि जंगलों के अंधाधुंध कटान होने की वजह से यह अब काफी कम मात्रा में मिलती है। चीन में इस मशरूम का इस्तेमाल सदियों से शारीरिक रोगों/क्षय रोगों को ठीक करने के लिए किया जा रहा है। गुच्छी मशरूम में 32.7 प्रतिशत प्रोटीन, 2 प्रतिशत फैट, 17.6 प्रतिशत फाइबर, 38 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेटस् पाया जाता है, इसीलिए यह काफी स्वास्थ्यवर्धक होता है। गुच्छी मशरूम से प्राप्त एक्सट्रैक्ट की तुलना डायक्लोफीनेक नामक आधुनिक सूजनरोधी दवा से की गई है। इसे भी सूजनरोधी प्रभावों से युक्त पाया गया है। इसके प्रायोगिक परिणाम ट्यूमर को बनने से रोकने और कीमोथेरेपी के रूप में प्रभावी हो सकते हैं। गठिया जैसी स्थितियों होने वाले सूजन को कम करने के लिए मोरेल मशरूम एक औषधीय रूप में काम करती है। ऐसा माना जाता है कि मोरेल मशरूम प्रोस्टेट व स्तन कैंसर की संभावना को कम कर सकता है। बाजार में इसकी कीमत 25 से 30 हजार रुपए प्रति किलो है। इस दुर्लभ सब्जी को पहाड़ों में साधु-संत भी ढूंढकर इकट्ठा करते हैं और ठंड के मौसम में इसका उपयोग करते हैं। इसको बनाने की विधि में ड्राइ फ्रूट, सब्जियां, घी इस्तेमाल किया जाता है।
ऐसा माना जाता है कि1980 के सिंहस्थ में जूना अखाड़ा के एक महंत ने 45 लाख रुपए की गुच्छी की सब्जी का भंडारा सात दिन तक चलाया था।
इसका सेवन सब्जी के रूप में किया जाता है। इसमें बी कॉम्प्लेक्स विटामिन, विटामिन डी और कुछ जरूरी एमीनो एसिड पाए जाते हैं। इसे लगातार खाने से दिल का दौरा पड़ने की संभावनाएं बहुत ही कम हो जाती हैं।
इसकी मांग सिर्फ भारत के पंच सितारा होटलों में ही नहीं, बल्कि यूरोप, अमेरिका, फ्रांस, इटली और स्विट्जरलैंड जैसे देशों में भी है। प्राकृतिक रूप से जंगलों में उगने वाली गुच्छी फरवरी से लेकर अप्रैल के बीच मिलती है।
बड़ी-बड़ी कंपनियां और होटल इसे हाथोहाथ खरीद लेते हैं। इस कारण इन इलाकों में रहने वाले लोग सीजन के समय जंगलों में ही डेरा डालकर गुच्छी इकट्ठा करते हैं। इन लोगों से गुच्छी बड़ी कंपनियां 10 से 15 हजार रुपए प्रतिकिलो के हिसाब खरीद लेती हैं, जबकि बाजार में इसकी कीमत 25 से 30 हजार रुपए प्रति किलो है। लेकिन चीन में इसकी खेती हो रही है जिसके कारण इसकी कीमत कम हो जाने से पहाड़ी गुच्छी इकठ्ठे करने वाले लोगों को नुकसान भी झेलना पड़ता है। इसलिए आवश्यकता है कि जब चीन इसकी खेती कर सकता है तो उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्य क्यों नहीं उत्तराखंड में तो जी. बी. पंत यूनिवर्सिटी जैसा देश का पहला कृषि व तकनीकी विश्वविद्यालय भी है।
गुच्छी की महत्वपूर्ण व संक्षिप्त जानकारी:-
०१.गुच्छी औषधीय गुणों से भरपूर होती है।
०२.इसका वैज्ञानिक नाम 'मार्कुला एसक्यूलेंटा' है।
०३.यह स्पंज मशरूम के नाम से देश भर में मशहूर है।
०४.गुच्छी एक कवक है जिसके फूलों या बीजकोश के गुच्छों की तरकारी बनती है।
०५.यह स्वाद में बेजोड़ और कई औषधियों गुणों से भरपूर है।
०६.भारत और नेपाल में स्थानीय भाषा में इसे 'गुच्छी', छतरी, टटमोर या डुंघरू कहा जाता है।
०७.उत्तराखंड व हिमाचल सहित भारत के कई हिमालयी हिस्सों में पाई जाती है
०८.मधुमक्खी के छत्ते जैसी टोपी के कारण आसानी से पहचाना जा सकती है।
०९.इसमें 32.7% प्रोटीन 2% फैट 17.6% फाइबर तथा 38% कार्बोहाइड्रेट होता है।
१०.औषधीय गुणों से भरपूर गुच्छी के नियमित सेवन से हृदयरोग नहीं होता है।
११.गुच्छी के सेवन से कई घातक बीमारियां दूर होती है।
१२.इसका प्रयोग कई प्रकार की दवा बनाने में किया जाता है।
१३ऐसा माना जाता है कि मोरेल मशरूम प्रोस्टेट व स्तन कैंसर की संभावना को कम कर सकता है।
१४.चीन में इस मशरूम का इस्तेमाल सदियों से शारीरिक रोगों/क्षय रोगों को ठीक करने के लिए किया जा रहा है।
१५.आज के दौर में अधिकतर लोग गुच्छी के गुणों से अनजान हैं इसीलिए इसका पूरा फायदा नहीं उठाया जा रहा है।
१६.गुच्छी ऊंचे पहाड़ी इलाके के घने जंगलों में कुदरती रूप से पाई जाती है।
जंगलों के अंधाधुंध कटान के कारण यह अब काफी कम मात्रा में मिलती है।
यह सबसे महंगी सब्जी है इसका दाम ₹25000 प्रति किग्रा से भी अधिक है।
गुच्छी के फायदे:
> हृदय रोग में फायदा।
> विटामिन बी सी डी व के की प्रचुर मात्रा।
> मोटापा सर्दी-जुकाम से लड़ने की क्षमता बढ़ाने में सहायक।
> प्रोस्टेट स्तन कैंसर की आशंका को कम करना।
> ट्यूमर बनने से रोकना।
> कीमोथेरेपी से आने वाली कमजोरी दूर करने में सहायक।
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