जम्भेश्वर भगवान का जीवन परिचय:-

श्री गुरु जंभेश्वर भगवान का जीवन परिचय
 श्री जंभेश्वर भगवान का अवतार विक्रम संवत 1508 (सन 1451) भादवा वदी आठ्म (जन्माष्टमी) को अर्द्धरात्रि कृतिका नक्षत्र में ग्राम पीपासर जिला जोधपुर (वर्तमान जिला नागौर) राजस्थान के ग्रामपति ठाकुर श्री लोहावट जी पंवार (राजपूत) की धर्मपत्नी हंसा देवी (केसर) की कोख से हुआ। उनके चाचा पुल्होजी प्रथम विश्नोई बनेऔर उनकी बुआ तांतु देवी थी ।
श्री जंभेश्वर भगवान 7 वर्ष तक बाल्यकाल में मोन रहे, 27 वर्ष तक गायें चराई एवं 51 वर्ष तक ज्ञानोपदेश दिया ।संवत् 1542(सन 1485) में 34 वर्ष की अवस्था में कार्तिक वदी आठ्म को समराथल धोरे पर पाहर बनाकर बिश्नोई पंथ की स्थापना की थी। विक्रम संवत 1593(सन 1536) मिंगसर वदी नवमी्(चितल नवमी्)को लालासर में निर्वाण को प्राप्त हुए।
 श्री जम्भेश्वर भगवान ने देश विदेश के विभिन्न क्षेत्रों में धर्म प्रचार कर विश्नोई धर्म के उपासक बनाएं।

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