शहीद स्थल खेजड़ली:-

यह जोधपुर से लगभग 22 किमी दक्षिण में स्थित है। 'खेजड़ली के खडाणे 'की घटना जोधपुर के तत्कालीन राजा अभय सिंह के शासनकाल की हैं ।संवत 1787 में राजा अभय सिंह के वजीर गिरधरदास भंडारी अपने कारिंदो एवं मजदूरों को लेकर खेजड़ली गांव में खेजड़ी के वृक्ष को काटने पहुंचा ।बिश्नोईयों ने वृक्ष काटने का विरोध किया पर भंडारी पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा। उसने शक्ति के नशे में वृक्ष काटने प्रारंभ कर दिए तभी वहां के आसपास के 84 गांव के विश्नोईयों ने वृक्षों की रक्षा के लिए प्राण न्योछावर करने प्रारंभ कर दिए इस घटना की पूर्णाहुति संवत 1787 की भादवा सुदी दशमी मंगलवार को हुई, जिसमें 363 स्त्री पुरुष शहीद हो गए। इन शहीदों की याद में यहां सन 1978 से भादवा सुदी दशमी को मेले का निरंतर आयोजन हो रहा हैं। इस मेले को प्रारंभ करवाने में स्व.संतकुमार  जी राहड  का विशेष योगदान रहा है ।यह मेला बिश्नोई समाज के वृक्ष -प्रेम का प्रतीक है ।यहां शहीदों की स्मृति में एक शहीद स्मारक बना हुआ है ।आज यह एक विश्व प्रसिद्ध स्थान बन गया है। अब समाज इसे एक विश्व प्रसिद्ध  धरोहर के रूप में विकसित करने का प्रयास कर रहा हैं।
 इन धामों के अतिरिक्त भी आज देश के विभिन्न भागों में गुरु जांभोजी के भव्य मंदिर एवं धर्मशाला बनी हुई हैं ।जिनमें नित्य हवन होता है ,और अमावस्या को शब्दवाणी के शब्दों का पाठ हवन एवं पाहल होते हैं ।इनमें से कुछ स्थानों पर समाज की ओर से भंडारे की भी व्यवस्था की जाती हैं ।आज देश की राजधानी दिल्ली से लेकर गांव-गांव तक गुरु जांभोजी के मंदिर बन गए हैं, उन सब का विस्तार से वर्णन करना संभव नहीं है।

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