जांभोजी का वंश परिचय:-

महाराजा विक्रमादित्य के 29 वें वंशधर  धारा नगरी के राजा भोज हूए और उनकी 9वीं पीढ़ी में पीपासर के रावलजी अपर नाम रोलोजी परमार(पंवार) क्षत्रिय हुए। रोलोजी के पुत्र लोहटजी  थे ।और इन्ही लोहटजी के यहां जांभोजी ने अवतार लिया था। रावलजी व रोलोजी  एक ही नाम है ।रोलोजी  उमर शाखा के  पंवार थे। रोलोजी कि मोहिलानी धर्मपत्नी राजाधिदेवी  से लोहटजी व पुल्होजी  का जन्म हुआ था ।उनके एक कन्या तांतू भी हुई थी । यह तीनों सगे भाई बहन थे और लोहटजी इन सब में बड़े थे।

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